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Yashvant Thakkar
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Thursday 16 October, 2008
 12:14 | 29/Apr/2008 |  0 Comment(s)
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CLASSROOM

---नमस्ते . गुरुजी.---धन्यवाद मेरे बच्चो.कैसे हो ?
---एकदम कुशल .धोनी की तरह.
---वाह! ज्ञान की प्राप्ति के लिए आजकल क्या करते हो?
---आई पी एल के खेल देखते है .गुरुजी.
-- वाह! क्या क्या प्राप्त होता है? बताओ.
---क्रिकेट देखने को मिलता है और साथ में मनोरंजन भी मिलता है गुरुजी.
---क्रिकेट के लिए कौन कौन होते है?
---धोनी..गांगुली..द्रविड़..सेहवाग...हेडन..वॉर्न..
---बहुत हो गया. अब ये बताओ की मनोरंजन कैसे प्राप्त होता है?
---चियर गर्ल से ...चियर गर्ल से.
---बस करो.बस करो.तुम तो ऐसे खुश हो रहे हो की जैसे सब चियर करने वाली कन्याएं तुम्हारी सामने हो.
--ऐसा ही लगता है गुरुजी.
---अच्छा.आई.पी.एल.के खेल से और कुछ प्राप्त होता है ?
---गीता का ज्ञान प्राप्त होता है.
---गीता का ज्ञान ? ये कैसे संभव हो सकता है ?
----हो सकता है गुरुजी.हम विस्तार से बता सकते है.
---बताइए.
---गीता मे कहा गया है की मनुष्य को संसार में हर स्थिति में जलकमलवत रहेना चाहिए. किन्तु श्रीशांत हार-जीत से विचलित हो कर बंदर जैसी हरकते करता था.इसी कारण हरभजन से प्रहार झेलना पड़ा और पूरे संसार के सामने रुदन करना पड़ा. हमे द्रविड़ जैसा अविचल रहेना चाहिए.
---अति उत्तम ! तुम इतना सारा कैसे सोच सकते हो ?
---ये आपके संस्कार है .गुरुजी.
---आई.पी.एल.से और क्या शिक्षा मिली ?
----आई.पी.एल. से हमे ये भी शिक्षा मिली की मनुष्य को क्रोधित नहीं होना चाहिए.वरना हरभजन जैसी हालत हो सकती है.आप जानते होगे की उसे काफी आर्थिक नुकशान भी हुआ है.
---सही बात है.
--और प्रीति ज़िंटा ने मैदान में आके शिक्षा दी की अन्याय करना भी पाप है और अन्याय सहन करना भी पाप है.
---अर्थात आई.पी.एल.का आयोजन सिर्फ पेसा कमाने के लिए नहीं हुआ है.
---बिल्कुल गुरुजी.आई.पी.एल का आयोजन हमें विविध प्रकार के तमाशे दिखाकर हमें अच्छी शिक्षा देनेके लिए किया गया है.
---तो आप सब सब से ज्यादा किस के आभारी है ?
---हम शरद पवारजी के आभारी है.
---अति उत्तम. तुम सबसे मै बहुत प्रसन्न हुआ हूँ .जाओ मैदान में जाकर खेलो और धोनी जैसे बलवान बनो.
--जैसी आप की आज्ञा गुरुजी.

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